[ जे. मोहन सिंह ]

नवी मुंबई : बच्चों के टैलेंट को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, ‘मास्क्स’ ने 15 दिनों के ऑर्गनाइज़ थिएटर वर्कशॉप के बाद ,वाशी के विष्णुदास भावे हाल में बच्चों ने भारतेन्दु की मशहूर रचना ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ और विष्णु मेहरा लिखित ‘चतुर चूहा’ में ज़बरदस्त परफॉर्मेंस देकर सभी का दिल जीत लिया। इस नाटक में जहां जमकर बच्चों ने पार्टिसिपेट किया, वहीँ ऑडियंस ने भी तालियों की गर्मजोशी से बच्चों को मोटिवेट किया।

‘अंधेर नगरी चौपट राजा ‘ और’ ‘चतुर चूहा’

भारतेंदु हरिश्चंद्र के मशहूर नाटक अंधेर नगरी में विवेकहीन और निरंकुश शासन व्यवस्था पर करारा व्यंग्य करते हुए राजा को अपने ही कर्मों द्वारा नष्ट होते दिखाया गया है। राजा फरियादी के भेङ दबने की शिकायत पर बनिया से शुरु होकर कारीगर, चूनेवाले, भिश्ती, कसाई और गड़रिया से होते हुए कोतवाल तक जा पहुंचता है और उसे फांसी की सज़ा सुना देता है।बच्चों द्वारा अभिनीत यह नाटक जहां एक ओर भ्रष्ट राजनीति पर तंज कसने में सफल रहा है , वहीँ ऑडियंस से भी इसने खूब तारीफे बटोरी।खासकर ‘अंधेर नगरी…’और ‘राम भजो….. ‘ गीत जुबान पर चढ़ जाते हैं।

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विष्णु मेहरा लिखित ‘चतुर चूहा’ ने भी ऑडियंस को हंसा हंसा कर लोट पोट कर दिया। जहां इन दिनों ऐसा माना जा रहा है कि मोबाईल, इंटरनेट के चलन ने किताबों और थिएटर के महत्व कम कर दिया है, वही बच्चों की इस लगन और ऑडियंस से भरे हुए हॉल ने यहां इस बात को गलत साबित कर दिया। हिंदी भाषा की खोती हुई इमेज को एक नया आयाम देने की ओर यह अच्छा कदम कहा जा सकता है। बच्चों की एक्साइटमेंट इस प्रोग्राम में देखने लायक थी ऑडियंस ने भी इसका खूब लुत्फ़ उठाया। दोनों ही नाटकों में ऑडियंस को हंसाने, गुद गुदाने और ठहाके लगवाने में बच्चे सफल रहे।
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इस प्रोग्राम के डायरेक्टर शिवदास घोड़के, राजेंद्र मेहरा और विष्णु मेहर द्वारा बच्चों पर की गयी मेहनत उनके परफॉर्मेंस में साफ़ दिख रही थी, बच्चों ने जिस बेबाकी से दोनों नाटकों को पेश किया उसे देखकर ऐसा लग रहा थी की जैसे सभी प्रोफेसशनलस हैं।

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नाटकों में विपिन वर्तक, निनाद वैकुल ने अपनी म्युज़िक से नाटकों में चार चाँद लगा दिए और अकबर खान के प्रकाश संयोजन ने इसके स्तर को बढ़ाये रखा।

हिंदी रंगमंच को प्रोत्साहित करने के लिए ज़रूरी कदम उठाएंगे : संजीव नाईक

इस मौके पर मौजूद यूथ लोकल लीडर संजीव नाईक ने नवी मुंबई में पांच नए रंगमंच थिएटर और फिल्मसिटी की तर्ज़ पर फिल्म स्टूडियो खोलने का आश्वासन दिया। नाइक ने कहा की वह खुद हिंदी रंगमंच को मोटिवेट करने के लिए ज़रूरी कोशिश करेंगे।
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वहीँ ‘मास्क्स’ के विष्णु महरा ने कहा कि वह नवी मुंबई में हिंदी थिएटर को मिले उम्मीद से दोगुने रिस्पॉन्स के शुक्रगुज़ार है। ‘मास्क्स ‘ इसी तरह हिंदी रंगमंच की सेवा करता रहेगा। उन्होंने बताया मास्क्स आगे भी ज़्यादा से ज़्यादा थियेटर करने को कोशिश करेगा।

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