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Youth Day: स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया को सिखाया भाईचारे का सबक, 10 कीमती बोल !

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मुंबई

आज स्वामी विवेकानंद की जयंती है, जिसे युवा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में जन्मे विवेकानंद ने धर्म को विज्ञान के नज़र से देखने का जो नज़रिया दिया, उसने पूरी दुनिया में एक अलग ही छाप छोड़ी।

1893 में अमेरिका स्थित शिकागो में विश्व धर्म संसद का आयोजन किया गया तो भारत की तरफ से विवकानंद ने सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। इस धर्म संसद में दुनिया भर से अलग-अलग धर्मों के विद्वानों ने हिस्सा लिया। इस बीच जब विवेकानंद ने सबके सामने वेदांत का ज्ञान दिया तो पूरा संसद तालियों से गूंज उठा था। विवेकानद ने अपने भाषण में दुनिया को बताया कि भारत सभी लोगों को एक परिवार की तरह देखता है। उन्होंने, दुनिया को बताया कि भारत न केवल शांति प्रिय देश है बल्कि वो सारे संसार के साथ सामंजस्य बिठाकर रहने और सबके लिए मदद के दरवाजे खोलने की नीति में भरोसा करता है।

उनके इस भाषण को अमेरिका समेत पूरी दुनिया ने सराहा, इस भाषण की चर्चा आज भी पूरी दुनिया में की जाती है। कई बीमारियों से ग्रस्त होने की वजह से उनका बेहद ही कम उम्र (39 साल) में चार जुलाई, 1902 को निधन हो गया।

एक नज़र स्वामी विवेकानंद के ऐसे 10 कीमती विचार पर, जिन्हें अपने व्यवहार में उतार कर आप अपने जीवन को पूरी तरह बदल सकते हैं :

1 . जितना बड़ा संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी।

2 . उठो और जागो और तब तक रुको नहीं जब तक कि तमु अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते।

3 . एक समय में एक काम करो , और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।

4 . जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते।

5 . किसी चीज से डरो मत,  तुम अद्भुत काम करोगे,  यह  निर्भयता ही है जो  क्षण भर में परम आनंद लाती  है।

6 . सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।

7 . विश्व एक व्यायामशाला है, जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं।

8 . जिस दिन आपके सामने कोई समस्या न आये–आप यकीन कर सकते है की आप गलत रास्ते पर सफर कर रहे है।

9 . जब तक जीना, तब तक सीखना, अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है।

10 . दिल और दिमाग के टकराव में दिल की सुनो।

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