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आखिरकार नारायण राणे ने बेटे संग कांग्रेस को कहा अलविदा, अब बीजेपी में जाने का रास्ता साफ़ !

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मुंबई

महाराष्ट्र के पूर्व चीफ मिनिस्टर नारायण राणे ने बीजेपी में शामिल होने की अटकलों के बीच आखिरकार थर्स्डे को कांग्रेस से नाता तोड़ लिया है। साथ ही उन्होंने विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने उन्हें सीएम बनाने का अपना वादा नहीं निभाया।

कांग्रेस से 12 साल पुराने रिश्ते को खत्म करते हुए, राणे ने पार्टी पर इल्ज़ामो की बौछार करते हुए कहा कि जब वह कांग्रेस में शामिल हुए थे तो पार्टी द्वारा उन्हें सीएम बनाने का वादा किया गया था, लेकिन पार्टी अपने वादे से मुकर गई है। राणे के बेटे और पूर्व कांग्रेस सांसद नीलेश ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन उनके दूसरे बेटे नितेश राणे जो कि भरष्ट्र के कंकावली से मौजूदा विधायक है उनकी स्थिति अभी साफ़ नहीं हुई है कि वो कांग्रेस में बने रहेंगे या पार्टी से इस्तीफा देंगे। शिवसेना में रहते हुए राणे 1999 में महाराष्ट्र के सीएम रह चुके है।

गौरतलब है कि इससे पहले राज्य कांग्रेस ने हाल में ही अपनी सिंधुदुर्ग इकाई भंग कर दी थी। क्योंकि महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले में राणे का अच्छा प्रभाव माना जाता है। राणे ने इसका जवाब देते हुए दो दिन बाद सिंधुदुर्ग के कुडाल कस्बे में बड़ी रैली कर अपना शक्ति प्रदर्शन किया और घोषणा की थी कि वह नवरात्र में कांग्रेस से अलग राह चुन लेंगे। जैसा की थर्स्डे को नवरात्र का पहला दिन था और वादे के मुताबिक राणे कांग्रेस से अलग हो गए। अब आखों में प्रदेश का सीएम बनने का सपना संजोये राणे के कांग्रेस छोड़ने के बाद जल्द ही बीजेपी खेमे में जानें की उम्मीद की जा रही है।

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कोंकण क्षेत्र में स्थित अपने गृह जिले सिंधुदुर्ग में एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कहने का ऐलान करते हुए कहा, ‘जब मैंने पार्टी ज्वाइन की थी, उस वक्त सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने मुझे सीएम बनाने का वादा किया था। साथ ही मैडम (सोनिया गांधी) ने भी मुझसे दो बार कहा था कि मुझे सीएम बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

राणे ने कहा, कांग्रेस को मेरा इस्तेमाल करना नहीं आया। कांग्रेस के कर्ता-धर्ता पार्टी को आगे ले जाने के इच्छुक नहीं हैं। कांग्रेस मुझे क्या निकालेगी, मैं खुद पार्टी से इस्तीफा दे रहा हूं। अब कांग्रेस को मेरा महत्व पता चलेगा। कई लोग मेरे साथ हैं। मैं कांग्रेस और शिवसेना का सफाया कर दूंगा।’

राणे 26 जुलाई 2005 को कांग्रेस में शामिल हुए थे। हालाकिं, बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर राणे ने बड़ी सफाई से ये ज़रूर कहा कि ‘उन्होंने अभी तय नहीं किया है कि कहां जाना है।’ लेकिन आपको बता दें, कुछ महीने पहले अहमदाबाद में राणे और बीजेपी नेशनल प्रेसिडेंट अमित शाह की मुलाकात हुई थी। वैसे, राणे ने अपने बयान में ये तो साफ़ कर दिया है कि वह कांग्रेस और शिवसेना का सफाया करना चाहते है। इसका मतलब साफ़ है कि राणे राज्य की सत्तधारी पार्टी बीजेपी के दामन को थामकर ही अपने अरमान निकालने की चाहत रखते है।

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