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चीन का एक रहस्मयी गांव, जहां की आबादी है ‘बौनी’, अनसुलझी पहेली !

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बचपन में ज़्यादातर लोगों ने दादी-नानी से बौनों की कहानियां ज़रूर सुनी होगी। लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे है चीन के एक ऐसे गांव के बारे में जो कहानी नहीं बल्कि हकीकत है। ऐसा गांव जहां पर ज़्यादातर लोगों के कद छोटे है। चीन के शिचुआन प्रांत के दूर दराज इलाके में यांग्सी गांव बसा हैं। दुनिया भर में यह गांव अपने छोटे कद के लोगों की वजह से एक अलग पहचान बना चुका हैं।

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यहां 50 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी है बौनी

लोकल निवासियों की मानें तो इस गांव में हर बच्चे की लम्बाई 5, 7 या 10 साल की उम्र के बाद रुक जाती है और उनका कद उनकी उम्र के हिसाब से नहीं बढ़ता। आम तौर पर देखा जाए तो लगभग हर 20000 इंसानों में से एक इंसान बौना होता है, यानी इनका प्रतिशत बहुत कम, लगभग आबादी का .005 होता है। लेकिन चीन के यांग्सी गांव में करीब 50 प्रतिशत आबादी बौनी है। इस गांव में लोगों की लम्बाई 2 फीट से लेकर 3 फीट 10 इंच तक होती है। इतनी ज़्यादा आबादी में लोगों के बौने होने की वजह से यह गांव बौनों के गांव के नाम से मशहूर है।

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खौफ से लोगों ने छोड़ दिया गांव

इस गांव में बौनों को देखे जाने की खबरें 1911 से ही आती रहती थी। हालांकि, ऑफिशियली इस खतरनाक बीमारी का पता 1951 में चला जब प्रशासन को पीड़ितों के अंग छोटे होने की शिकायत मिली। वहीं, 1985 में जब जनगणना हुई तो इस गांव में ऐसे करीब 119 मामले सामने आए। समय के साथ ये रुकी नहीं, पीढ़ी दर पीढ़ी ये बीमारी भी आगे बढ़ती गई। इसके डर से लोगों ने गांव छोड़ कर जाना शुरू कर दिया ताकि बीमारी उनके बच्चो में न आये।

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आज भी अनसुलझी है पहेली

यह गांव पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा सवाल बना गया है, आखिर ऐसा क्या हुआ की एक सामन्य कद काठी के लोगों का गांव, बौनों के गांव में तब्दील हो गया? वैज्ञानिक और विशेषज्ञ इस गांव की पानी, मिटटी, अनाज आदि का कई मर्तबा अध्ययन कर चुके है लेकिन वो इसकी वजह खोजने में नाकाम रहे हैं। यह रहस्य वैज्ञानिक 60 साल बाद आज तक नहीं सुलझा पाये हैं।

वैसे समय समय पर इसके रहस्य के बारे में अलग अलग दावे ज़रूर किये जाते रहे है। 1997 में बीमारी की वजह बताते हुए गांव की जमीन में पारा होने की बात कही गई, लेकिन इसे साबित नहीं किया जा सका। वहीँ, कुछ लोगों का मानना है कि लड़ाई के दौरान जो ज़हरीली गैसें हैं जापान ने कई दशकों पहले चीन में छोड़ी थी यह उसका ह असर है, हालांकि यह एक तथ्य है की जापान कभी भी चीन के इस इलाके में नहीं पहुंचा था। ऐसे ही समय-समय पर तमाम दावे किए गए, लेकिन सही जवाब नहीं मिला।

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खतरनाक बीमारी और बुरी ताकतों का असर

गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उनकी खुशहाल और सुकून भरी जिंदगी कई दशकों पहले ही खत्म हो चुकी थी, जब प्रांत को एक खतरनाक बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया था। जिसके बाद से कई सभी लोग अजीबोगरीब हालात से जूझ रहे हैं, जिसमें ज़्यादातर 5 से 7 साल के बच्चे हैं। इस उम्र के बाद इन बच्चों की लंबाई रुक जाती है। इसके आलावा अब गांव के कुछ लोग इसे बुरी ताकत का प्रभाव मानते हैं, तो कुछ लोगों का कहना है कि खराब फेंगशुई के चलते ऐसा हो रहा है। वहीं, कुछ का कहना ये भी है कि ये सब अपने पूर्वजों को सही तरीके से दफन न करने के चलते हो रहा है।

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विदेशियों को जाने की इजाज़त नहीं

चीन के इस गांव में वैसे तो चीनी एडमिनिस्ट्रेशन आने को मना नहीं करता, लेकिन वहां पर किसी विदेशी को जाने की इज़ाज़त नहीं है। यहां के बारे अधिकतर जानकारी यहां पहुंच पाने वाले रिपोर्टर्स के द्वारा ही मिल पाती है। लेकिन लोगों को इस गांव के बारे में जानने की दिलचस्पी बढ़ जाती है, यहीं वजह है कि यहां स्पेशल परमिशन लेकर टूरिस्ट आते रहते है और यह गांव पूरी दुनिया में लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

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