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मायावती बोली, रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति संवेदना और सहानुभूति दिखाए मोदी सरकार !

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नई दिल्ली

म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों की परेशानियों पर अब बसपा (बहुजन समाज पार्टी) सुप्रीमों मायावती ने मोदी सरकार पर हमला बोला है। साथ ही उन्होंने सरकार को रोहिंग्या शरणार्थियों के साथ नरमी बरतने की नसीहत दी है।

मायावती ने रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि भारत सरकार को मानवता के नाते इन लोगों के साथ सख्त और कड़ा रुख नहीं अख्तियार करना चाहिए। मायावती ने कहा कि जो रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार में फैली हिंसा और अशांति की वजह से भारत में शरण लेने के लिए आ रहे हैं, भारत सरकार से कहा कि उनके प्रति मानवता एवं इंसानियत के नाते सख्त रवैया नहीं अपनाना चाहिए और न ही राज्यों को इसके लिए मजबूर किया जाना चाहिए।

मायावती ने वेडनेसडे कहा कि मायावती ने कहा कि म्यांमार के सीमावर्ती राज्यों हिंसा फैली हुई है, जिसके चलते लाखों रोहिंग्या मुसलमानों ने बांग्लादेश में शरण ले रखी है। भारत में भी हजारों रोहिंग्या मुसलमान शरणार्थी बनकर आ रहे हैं, लेकिन इनको लेकर पीएम मदी का रुख साफ नहीं है, जिसके चलते असमंजश की स्थिति लगातार बनी हुई है। मायावती ने कहा कि भारत सरकार को रोहिंग्या मुसलमानों के साथ मानवीय दृष्टिकोण रखना चाहिए, भारत की यह परंपरा रही है।

साथ ही, उन्होंने कहा भारत सरकार को म्यांमार एवं बांगलादेश की सरकार से बातचीत करके रोहिंग्या मुसलमानों के मामले को सुलझाने की कोशिश करना चाहिए ताकि उनका पलायन रुक सके।

भारत का शरण देने से इंकार

इधर, भारत सरकार ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ़ करते हुए कहा है कि वह रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में शरण नहीं देगा, साथ ही होम मिनिस्ट्री ने साफ़ तौर पर कहा कि भारत में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों अपने देश लौटना होगा। यही नहीं भारत सरकार ने भारत-म्यांमार सीमा पर सुरक्षा को बढ़ा दिया है, साथ ही सीमा पर रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है।

यूएन की अपील, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से रोहिंग्या शरणार्थियों की सहायता करें

उधर, संयुक्त राष्ट्र ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह अपने राजनीतिक मतभेदों को परे रखते हुए रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों की मदद के लिए किए जा रहे मानवीय प्रयासों में सहयोग करें।

वही, गृह राज्य मंत्री किरण रिजीजू ने वेडनेसडे को रोहिंग्या मुसलमानों के मामले में भारत की खलनायक जैसी इमेज बनाने की कोशिशों की आलोचना करते हुए कहा है कि यह देश की इमेज धूमिल करने की सोची समझी साज़िश है। खास बात ये है कि रिजीजू का ये बयान संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार चीफ ज़ैद बिन राद अल हुसैन द्वारा म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थियों को भारत से वापस भेजने की आलोचना करने के दो दिन बाद आया है।

क्या है पूरा विवाद

12वीं सदी की शुरुआत में म्यांमार के रखाइन इलाके में रोहिंग्या समुदाय आकर बसा था, लेकिन स्थानीय बौद्ध बहुसंख्यक समुदाय ने उन्हें आज तक अपना नहीं माना। यह मामला उस वक्त तूल पकड़ गया जब 2012 में रखाइन में कुछ सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी गई थी, हत्या के बाद रोहिंग्या और सुरक्षाकर्मियों के बीच व्यापक हिंसा भड़क गई। जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच हिंसा आज भी जारी है। 25 अगस्त को रोहिंग्या मुसलमानों ने पुलिस वालों पर हमला कर दिया था, जिसके बाद कंडीशन और भी ज़्यादा ख़राब हो गई है।

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