चंद्र ग्रहण
104 साल बाद 27 जुलाई 2018 को ऐसा दुर्लभ चंद्रग्रहण लगने जा रहा है, जो एक राशि के जातकों के लिए घातक साबित हो सकता है। बाकी 11 राशियों पर भी खास असर रहेगा, तो इस दिन कुछ खास बातों का ध्यान रखना होगा।
आषाढ़ पूर्णिमा की रात 27 जुलाई को आधी रात में खग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। यह खग्रास चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक दोपहर बाद 2.54 बजे प्रारंभ होगा। ग्रहण रात 11.54 मिनट से सुबह 3 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। सूतक लगने के कारण शाम के समय मंदिर के कपाट नहीं खुलेंगे।
यह ग्रहण आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा और उत्तराषाढ़ नक्षत्र के अंतिम दो घटी एवं श्रवण नक्षत्र के आद में खग्रास चंद्र ग्रहण होगा। उत्तराषाढ़ के चतुर्थ चरण में होने के कारण उत्तराषाढ़ के चतुर्थ चरण एवं श्रवण नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्म लेने वाले व्यक्तियों के लिए यह ग्रहण घातक है।
– चंद्रग्रहण 
विशेषकर मकर राशि के जातकों के लिए ग्रहण हानिकारक रहेगा। कुछ विशिष्ट व्यक्तियों एवं शासकों के लिए भी संघर्षमय स्थिति उत्पन्न करेगा। खग्रास चंद्र ग्रहण के समय मकरस्थ चंद्र के साथ स्थित मंगल और केतु पर राहु, सूर्य और बुध की दृष्टि है। सूर्य राहु के साथ शनि का षडष्टक योग भी बन रहा है, इसलिए राजनीतिज्ञों और शासकों में भी उथल-पुथल रहेगा।
देश के कुछ भागों में भारी प्राकृतिक आपदा से जनधन की हानि होगी। चूंकि चंद्रमा क्रूर ग्रह से युक्त एवं सूर्य राहु से दृश्य होने के कारण राजनीतिज्ञों के लिए चिंताजनक है। खग्रास चंद्र ग्रहण आषाढ़ मास में घटित हो रहा है। यह कुछ प्रांतों में सूखे से जनजीवन त्रस्त रहेगा।
  इस प्रकार होगा ग्रहण का स्पर्श और आदि काल
  ग्रहण—————-समय
 ग्रहण का स्पर्श——–23:54
  खग्रास प्रारंभ———01:00
  ग्रहण का मध्य काल—00:54
  खग्रास समाप्त——–02:43
  ग्रहण का मोक्ष काल—03:49
  ग्रहण का पर्व काल—-03:55
मकर राशीस्थ चंद्र ग्रहण फल…
मेष – इस राशि केलिए सुख संपत्ति का लाभ होगा।*
वृष – मान अपमान का योग है, सावधान रहिए।*
मिथुन – शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक परेशानी होगी।*
कर्क – पति पत्नी परेशान होंगे।*
सिंह – सामान्य सुख का योग।*
कन्या – मानसिक परेशानी होगी।*
तुला – इस राशि वालों के लिए कष्टकारक होगा।*
वृश्चिक – जन-धन का लाभ।*
धनु – जन-धन की हानि।*
मकर – विशेष कष्टकर और घातक सरेग है।*
कुंभ – व्यापार नौकरी और विद्या की हानि।*
मीन – हर प्रकार से लाभ, सुख संपति की प्राप्ति।*
मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए यह ग्रहण किसी राज योग से कम नहीं है। इनके लिए अत्यंत लाभकारी है। अन्य आठ राशि वालों के लिए कष्टदायक है। वृष मिथुन कर्क कन्या तुला धनु मकर और कुंभ राशियों के लिए यह खग्रास अशुभ है। स्नान, दान, जप आदि करना शुभ रहेगा।
               – चन्द्र ग्रहण के नियम पालनीय –
  चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है। श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्धि होने पर उस घृत को पी ले। ऐसा करने से वह मेधा (धारणशक्ति), कवित्वशक्ति तथा वाक् सिद्धि प्राप्त कर लेता है।
  सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक ‘अरुन्तुद’ नरक में वास करता है।
  सूर्यग्रहण में ग्रहण चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर (9) घंटे पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं।
  ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।
  ग्रहण वेध के प्रारम्भ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।
  ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव-पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल (वस्त्रसहित) स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं।
  ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।
  ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए।
  ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए। ग्रहण के स्नान में गरम जल की  अपेक्षा ठंडा जल, ठंडे जल में भी दूसरे के हाथ से निकाले हुए जल की अपेक्षा अपने हाथ से निकाला हुआ, निकाले हुए की अपेक्षा जमीन में भरा हुआ, भरे हुए की अपेक्षा बहता हुआ, (साधारण) बहते हुए की अपेक्षा सरोवर का, सरोवर की अपेक्षा नदी का, अन्य नदियों की अपेक्षा गंगा का और गंगा की अपेक्षा भी समुद्र का जल पवित्र माना जाता है।
  ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।
  ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए। बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए व दंतधावन नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल-मूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन – ये सब कार्य वर्जित हैं।
 ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।
  ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सुअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।
  तीन दिन या एक दिन उपवास करके स्नान दानादि का ग्रहण में महाफल है, किन्तु संतानयुक्त गृहस्थ को ग्रहण और संक्रान्ति के दिन उपवास नहीं करना चाहिए।
  भगवान वेदव्यासजी ने परम हितकारी वचन कहे हैं- ‘सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया  पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) एक लाख गुना और सूर्यग्रहण में दस लाख गुना फलदायी होता है। यदि गंगाजल पास में हो तो चन्द्रग्रहण में एक करोड़ गुना और सूर्यग्रहण में दस करोड़ गुना फलदायी होता है।’
  ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम-जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।
  ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षों का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है। (स्कन्द पुराण)
  भूकंप एवं ग्रहण के अवसर पर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिए।(देवी भागवत)
अस्त के समय सूर्य और चन्द्रमा को रोगभय के कारण नहीं देखना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्णजन्म खं. 75.24)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here