[अरुण कौशिक ]

 
मुंबई: एट्रोसिटी कानून में लाए गए बदलाव के विरोध में कांग्रेस की सोशल मीडिया और सफाई कामगार सेल ने मुंबई कलेक्टर ऑफिस पर एक दिन का सांकेतिक आंदोलन किया।
यह आंदोलन कांग्रेस की बांद्रा ईस्ट विधानसभा सोशल मीडिया सेल के चीफ रमेश पवार ने आयोजित किया था जिसकी अध्यक्षता मुंबई कांग्रेस चीफ संजय निरुपम ने की। जिया न्यूज़ मुंबई से बात करते हुए संजय निरुपम ने कहा, ”जाती के नाम पर जब जब राजनीतिक पार्टियों ने सियासत की है तब तब समाज ने उसे रिजेक्ट किया है लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि आरक्षण नहीं होना चाहिए,इसका यह मतलब नहीं कि लोगों को एजुकेशन और नौकरी में प्राथमिकता नहीं मिलनी चाहिए,बिलकुल मिलनी चाहिए।”
संजय निरुपम ने यह भी कहा,”यह समाज की जिम्मेदारी बनती है कि पिछड़े वर्ग के लोगों को आगे लाने के लिए मौके दिए जाने चाहिए और इस मुद्दे पर कांग्रेस राजनीति नहीं करती बल्कि यह हमारा धर्म है। ”
कांग्रेस के युवा लीडर रमेश पवार ने कहा कि एक दिन के सांकेतिक आंदोलन में एट्रोसिटी एक्ट मुद्दे के अलावा भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में दलित युवाओं पर लिए गए केस वापिस लेने,बाबासाहेब आंबेडकर – शिवाजी स्मारक का काम जल्द से जल्द पूरा करने,सरकारी नौकरी में जल्द प्रमोशन किए जाने और पुणे हिंसा के आरोपी भिड़े गुरूजी को अरेस्ट करने जैसे मुद्दे शामिल थे।
आंदोलन में मुंबई कांग्रेस चीफ संजय निरुपम, कृपाशंकर सिंह,सुनील अहिरे सहित कांग्रेस के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने शिरकत की और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
इस आंदोलन में चौंकाने वाली बात यह रही कि कांग्रेस के बड़े दलित नेता कहीं भी नज़र नहीं आए।

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