[मुरारी सिंह ]

 इस अभागे ब्रिज की लंबी आयु की गारंटी कौन लेगा ?

 
मुंबई: विकास के नाम पर जान से खिलवाड़ कोई भी नहीं चाहेगा लेकिन ऐसा हो रहा है, सब की आंखों के सामने हो रहा है और प्रशासन की नाक के ठीक नीचे हो रहा है। यहां बात आदम इलाके की नहीं बल्कि देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की हो रही है।
 
यह ब्रिज किसी आदम इलाके में नहीं है –
 
मुंबई के गोरेगांव वेस्ट एरिया में स्वामी विवेकानंद रोड पर एमटीएनएल ऑफिस के ठीक बाहर एक ब्रिज पिछले कई सालों से अपने पूरा होने की बाट जो रहा है। गोरेगांव वेस्ट और ईस्ट को जोड़ने वाला एक फ्लाई-ओवर तो है लेकिन इस जंक्शन पर गाड़ियों की आवाजाही इतनी है कि ट्रैफिक संभलते भी नहीं संभालता।
 
 
कछुए की चाल से भी धीरे चल रहा है ब्रिज का काम –
 
एमटीएनएल जंक्शन का ट्रैफिक कम करने के लिए प्रशासन ने एक ब्रिज पास कर दिया। ब्रिज का काम शुरू भी हुआ लेकिन धीरे-धीरे काम ठंडे बस्ते में चला गया। महाराष्ट्र में बीजेपी की गवर्नमेंट आने के बाद गोरेगांव के भाग खुल गए। इस एरिया से दो एमएलए को मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया। बीजेपी की विद्या ठाकुर और शिवसेना के सुभाष देसाई। 
 
ब्रिज पास करवाने के लिए हुए अनशन –
 
विद्या ठाकुर ने ब्रिज का काम जल्द पूरा करने के लिए इंटरेस्ट दिखाया। इस काम में उनका बेटा और कॉर्पोरेटर दीपक ठाकुर भी उनके साथ है। अक्सर विद्या और दीपक ठाकुर इस ब्रिज के काम का इंस्पेक्शन करते दिख जाया करते हैं। दीपक ठाकुर ने जिया न्यूज़ मुंबई को बताया कि ट्रैफिक की प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए उन्होंने बीएमसी से ब्रिज पास करवाने के लिए अपनी माताजी विद्या ठाकुर के साथ कई बार अनशन भी किए और ब्रिज पास भी हो गया।
 
 
 
जल्दी काम पूरा करने में हो रही है लापरवाही –
 
बीएमसी ने ब्रिज पास भले ही कर दिया हो लेकिन ब्रिज को जल्द से जल्द बनाकर मुंबईकरों को सौंपने में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं दिखाई दे रहा।विद्या और दीपक ठाकुर के प्रयासों से ब्रिज का काम तेजी से शुरू तो हो गया लेकिन ब्रिज का काम मानसून से पहले खत्म करने की जल्दबाजी और हड़बड़ी में कांट्रेक्टर और बीएमसी ने ब्रिज के नीचे से गुजरने वाले सैकड़ों मुसाफिरों की जान का जैसे यमराज से ‘सौदा’ ही कर लिया हो।
 
काम को पूरा करने की होड़ में हो रही है फॉर्मिलिटी –
 
ब्रिज का काम अब दिन-रात चल रहा है,बिना रोक-टोक के धड़ल्ले से चल रहा है लेकिन न तो बीएमसी के जिम्मेदार ऑफिसर्स साइट की बारीकी से सुध ले रहे हैं और न ही कांट्रेक्टर। जल्दबाजी में ब्रिज के सभी गर्डर फिक्स कर दिए गए। इन गर्डर को देखकर ऐसा लगता है जैसे बीएमसी और कांट्रेक्टर अपनी जिम्मेदारी जल्द पूरी करने के चक्कर में फॉर्मिलिटी कर रहे हैंयहां चल रहे काम को देख कर आप को अंदाज़ा हो जायेगा कि बीएमसी ने अपने जिस लाडले कांट्रेक्टर को काम दिया है उसके पास वो टेक्निकल टीम नहीं है जो इस काम के लिए बनी हो।
 
पहले भी हो चुका है हादसा –
 
वैसे इस ब्रिज के काम के दौरान एक हादसा हो चुका है लेकिन गनीमत रही कि इस हादसे में किसी की भी जान नहीं गयी,गरीब मजदूर की भी नहीं। ब्रिज के काम में हो रही लापरवाही कोई भी जा कर अपनी नंगी आंखों से देख सकता है। 
 
 इस अभागे ब्रिज की लंबी आयु की गारंटी कौन लेगा ? 
 
इस अभागे ब्रिज को लेकर बड़ा सवाल यह है कि जल्दबाजी और लापरवाही में तैयार किये गए इस ब्रिज की लंबी आयु की गारंटी कौन लेगा ? लोकल कॉर्पोरेटर दीपक ठाकुर का कहना है कि यह ब्रिज बीएमसी का है।
 
 
 
 

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