जब पुलिस की इज्जत होने लगी सड़क पर नीलाम –
 
[उमेश धनराले ]
 
नासिक : इतिहास गवाह है,जब जब पुलिस की इज्जत नीलम होने पर आयी पुलिस किसी भी हद तक गिरने से बाज नहीं आयी। यहां बात महाराष्ट्र के जलगांव जिले की पुलिस की हो रही है। वैसे डिपार्टमेंट की ऐसी कहानी तकरीबन हर राज्य की एक जैसी ही है।
 
अपराधियों के सामने बौनी हो गयी है पुलिस –
 
चंद दिनों पहले जलगांव के बिजनेसमैन और पेट्रोलपंप मालिक अली असगर हकीमोद्दीन बोहरी की सरे राह गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। अली असगर हकीमोद्दीन बोहरी की हत्या से जलगांव के लोगों ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आरोप लगने शुरू हो गए कि पुलिस निक्कमी हो गयी है,पुलिस अपराधियों के सामने बौनी हो गयी है। 
 
हर वारदात के पीछे सिर्फ एक ही गुंडे का नाम –
 
जलगांव का वातावरण गर्म होने लगा और पुलिस की इज्जत सड़क पर नीलाम होने पर आ गयी। वो इस लिए कि पुलिस न तो हत्या का कोई कारण पता कर पायी और न ही शूटरों का। अपने खिलाफ आक्रोश बढ़ता देख जलगांव पुलिस को ‘आईडिया’ आया और एक प्रेस रिलीज़ जारी करते हुए सीना ठोक कर ऐलान कर दिया कि अली असगर हकीमोद्दीन बोहरी के मर्डर में वांटेड गैंगस्टर राज चव्हाण का ही हाथ है।
 
जलगांव का खूंखार गुंडा है राज चव्हाण –
 
गौरतलब हो कि राज चव्हाण जलगांव का खूंखार गुंडा है और कई संगीन मामलों में लिप्त है। 18 मार्च को जलगांव में लोकल टीचर दीपक पाटिल की भी बेरहमी से हत्या कर दी गयी थी। तब भी पुलिस को कोई सुराग नहीं मिला था और इस हत्या पीछे भी पुलिस ने राज चव्हाण का ही हाथ बताया था।
 
वारदात को अंजाम देकर ‘अंतर्ध्यान’ हो जाता है राज –
 
अब सवाल उठने लगें हैं कि पुलिस को वारदात के पीछे राज चव्हाण का नाम तो पता चल जाता है लेकिन जिले का खूंखार गुंडा राज चव्हाण वारदात को अंजाम देकर कहां ‘अंतर्ध्यान’ हो जाता है यह पुलिस आज तक पता नहीं कर पायी है।

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