[ उमेश धनराले ]

पत्नी मंदाकिनी और दामाद गिरीश चौधरी को भी मिली राहत
पुणे : भाजपा के सीनियर लीडर और महाराष्ट्र के फॉर्मर राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे को भोसरी जमीन घोटाले में क्लीन चित मिल गयी है। इस घोटाले के सामने आने के बाद  न सिर्फ उनका मंत्री पद चला गया था बल्कि पूरा पोलिटिकल करियर दांव पर लग गया था।
 
एसीबी की रिपोर्ट में खडसे को क्लीनचिट –
 
भोसरी जमीन स्कैंडल की सुनवाई कर रही पुणे की स्पेशल एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस स्कैंडल में एकनाथ खडसे की भूमिका के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं। कोर्ट ने एकनाथ खडसे के अलावा उनकी पत्नी मंदाकिनी और दामाद गिरीश चौधरी को ही भी राहत दी है।
 
क्या मिलेगी मंत्रिमंडल में जगह –
 
एकनाथ खडसे को क्लीन चिट मिल जाने के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या महाराष्ट्र के चीफ मिनिस्टर देवेंद्र फडणवीस उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में जगह देंगे ? बता दें कि पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक गलियारे एकनाथ खडसे के बीजेपी को राम राम बोलकर दूसरी पार्टी का दामन थामने की अटकलों से पटे पड़े थे। एकनाथ खडसे को भी कांग्रेस के फंक्शन अटेंड करते देखा गया था।
 
क्या था पूरा मामला –
एक नाथ खडसे पर आरोप थे कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और भोसरी एमआईडीसी में 40 करोड़ से भी ज्यादा कीमत की जमीन कौड़ियों के भाव में खरीद ली थी। एकनाथ खडसे का घोटाला पुणे के बिल्डर हेमंत लक्ष्मण गावंडे को नागवार गुजरा और उसने पुलिस ने कंप्लेंट करनी चाही लेकिन पुलिस ने मिनिस्टर एकनाथ खडसे के खिलाफ कंप्लेंट रजिस्टर करने से मना कर दिया। 
 
हाईकोर्ट ने दिए एसीबी को जांच के आदेश –
 
जब पुलिस ने उसकी कंप्लेंट पर संज्ञान नहीं लिया तब हेमंत गावंडे ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट के सामने पुलिस ने तर्क रखा कि इस मामले में किसी भी तरह की एफआईआर रजिस्टर नहीं की जा सकती। पुलिस के इस जवाब के बाद कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो को इस मामले की निष्पक्ष जांच करने के आदेश दिए। एंटी करप्शन ब्यूरो ने भोसरी जमीन मामले में पुणे के बंदगार्डन पुलिस स्टेशन में एफआईआर रजिस्टर की और इन्वेस्टीगेशन शुरू कर दी।  
 
कोर्ट ने दी एकनाथ खडसे को क्लीनचिट – 
 
भोसरी जमीन मामले में एकनाथ उस वक़्त ज्यादा बढ़ गयी जब एमआईडीसी ने उस विवादित जमीन को अपना बताया। एसीबी ने पूरे मामले की इंवस्टिगेशन पूरी की और मंडे को अपनी रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की।  एंटी करप्शन ब्यूरो की रिपोर्ट की गहनता से तफ्तीश करने के बाद कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भोसरी जमीन स्कैंडल में एकनाथ खडसे ने न हो अपने पद का दुरूपयोग किया और न ही इसमें किसी प्रकार का घाटा सरकार को हुआ।

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