मुंबई

महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में साल की शुरुआत (1 जनवरी) में दलितों के शौर्य दिवस पर हुई हिंसा के मामले में पुणे पुलिस ने कई दलित नेताओं और कार्यकर्ताओं के घरों और दफ्तरों पर छापेमारी की है।

इस मामले में मंगलवार को पुलिस ने कई शहरों में प्रसिद्ध दलित नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ छापे मारे की। पुणे पुलिस के कई टीमों ने तड़के पांच बजे से छापा मारने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान मुंबई, पुणे और नागपुर में कई दलित कार्यकर्ताओं के घरों और ऑफिस में छापे मारे गए। इसके अलावा पुलिस ने पिछले साल 31 दिसंबर को हुई यलगार परिषद में शामिल या संबंधित लोगों के खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया है।

आपको बता दें कि पिछले साल 31 दिसंबर को हुई यलगार परिषद में गुजरात के दलित नेता और विधायक जिग्नेश मेवाणी, जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद, छत्तीसगढ़ की एक्टिविस्ट सोनी सोरी और भीम आर्मी के अध्यक्ष विनय रतन सिंह ने लोगों को संबोधित किया था। इस सिलसिले में पुणे पुलिस ने नागपुर के मशहूर एडवोकेट सुरेंद्र गडलिंग के घर पर भी छापा मारा और तलाशी ली। पुणे पुलिस की टीम ने मुंबई में वामपंथी कार्यकर्ताओं सुधीर धवाले और हर्षाली पोटदार के घर पर भी छापेमारी की।

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इधर, पुलिस की कार्रवाई पर संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर के परपोते और भारतीय रिपब्लिकन पार्टी बहुजन महासंघ के प्रेसिडेंट प्रकाश आंबेडकर ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे सरकार की ‘उत्पीड़’न और ‘ध्यान भटकाने वाली रणनीति’ बताया है।

अंबेडकर के मुताबिक, सरकार कोरेगांव-भीमा हिंसा भड़काने के मुख्य आरोपी संभाजी भिड़े ऊर्फ गुरुजी को गिरफ्तार करने के बजाय इस तरह के ध्यान भटकाने वाली कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने मिलिंद एकबोटे को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन अभी तक भिड़े को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

गौरतलब है इस साल एक जनवरी को भीमा कोरेगांव लड़ाई की 200वीं सालगिरह के एक दिन पहले 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवड़ा में यलगार परिषद कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस आयोजन को लेकर दो पक्ष आपस में भिड़ गए थे, जिसके बाद पूरे शहर में हिंसा फैल गई थी और एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। जिसके बाद हिंसा के विरोध में 3 जनवरी को अंबेडकर और अन्य पार्टियों ने महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया था।

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