[सुमन कौशिक ]

 
मुंबई: मानसून के दौरान सबसे अधिक प्रॉब्लम होती है उन मुसाफिरों को जो सेंट्रल रेलवे पर ट्रेवल करते हैं। इसी लिए सेंट्रल रेलवे ने अभी से कमर कस ली और युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है।
मानसून के समय मुंबई और मुंबई सबर्ब के रेलवे ट्रैक पर पानी नहीं खड़ा हो इसी लिए रेलवे ने बीएमसी के साथ मिलकर नालों की सफाई का काम तो शुरू कर ही दिया है इसके अलावा कसारा-कर्जत के घाटों से निकलने वाली रेलवे ट्रैक पर गिरने वाली चट्टानों का जायजा लेना भी शुरू कर दिया है।
इस साल खास बात यह है कि कसारा-कर्जत घाट पर बनी ट्रैक और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों का जायजा लेने के लिए रेलवे ड्रोन कैमरों की हेल्प ले रही है। ड्रोन की हेल्प उन चट्टानों को चिन्हित किया जाता है जिनमें दरार आ गयी हैं या जिनकी खिसकने की संभावना है। एक बार खिसकने वाली चट्टानों का पता लगने के बाद उन्हें या तो सीमेंट से पाट दिया जाता है या फिर ऐसा बंदोबस्त किया जाता है ताकि चट्टानें खिसकें नहीं और अगर चट्टान खिसक भी जाए तो रेलवे ट्रैक को नुकसान न हो।
रेलवे ट्रैक की निगरानी के अलावा रेलवे ड्रोन से उन कामों पर भी नज़र रख रहा है जहां रिपेयर का काम शुरू है। रेलवे का दावा कि ड्रोन उनके लिए बहुत कारगर साबित हो रहा है।

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