मुंबई

मशहूर ग़ज़ल फ़नकार और अपनी आवाज़ से लाखों दिलों पर राज करने वाले उस्ताद असलम हुसैन ख़ाँ ने 22 मार्च 2018 को मुंबई में दुनिया को अलविदा कह दिया। कहते है महान लोग मरते नहीं बल्कि अमर हो जाते और ये बात उनके चाहने वालों की बेशुमार फेहरिस्त देख कर भी साबित होती है।

स्टूडेंट के दिलों में आज भी ज़िंदा है- उस्ताद असलम ख़ाँ

फ़नकार चले जाते है, लेकिन उनके गीत ज़िंदा रहते है और उस्ताद असलम ख़ाँ साहब की याद में अब उनके फैंस और उनके म्युज़िक के स्टूडेंट्स ने मुंबई के जीवीपीडी (जुहू) में 18 अप्रैल की शाम (बुधवार) को शोक सभा आयोजित की है। संगीत के महारथी उस्ताद असलम ख़ाँ साहब के सम्मान और याद में रखी गई इस शोक सभा में उनके परिवार समेत संगीत की दुनिया से जुड़े लोग शामिल होकर ग़ज़ल फनकार को श्रृद्धांजलि देगें।

उत्तर प्रदेश से था गहरा नाता

14 अप्रैल 1940 को जन्में जाने मानें संगीतकार उस्ताद असलम ख़ाँ साहब को शास्त्रीय संगीत में भी महारथ हासिल थी। भारतीय संगीत को अपने 50 साल समर्पित करने वाले उस्ताद असलम ख़ाँ साहब मेरठ के हापूर घराने से ताल्लुक रखते थे। उन्होंने उत्तर भारत में भी अपने कई शो किये जिसे लोग आज भी याद करते है। उस्ताद असलम ख़ाँ के घराने से ताल्लुक रखने वाले उस्ताद शादी खान और उस्ताद मरुद खान मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के दरबार के संगीतकार रह चुके है।

शास्त्रीय संगीत के चार घरानों का प्रतिनिधित्व करते थे असलम ख़ाँ

संगीत को अपनी आत्मा बताने वाले उस्ताद असलम ख़ाँ साहब हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के चार स्कूलों (घरानों) का प्रतिनिधित्व करते थे, जिसमे प्रतिष्ठित हापूर घराना, खुर्जा घराना, अट्रौली-जयपुर घर, आगरा घराना और दिल्ली तानास खान घराने, इन सभी घरानों में मशहूर संगीतकार उस्ताद अल्ताफ हुसैन खान, ग्यान सम्राट उस्ताद अज़मत हुसैन खान, संगीत सम्राट उस्ताद अल्लादिया खान, ग्यान आचार्य उस्ताद विलायत हुसैन खान, आफ्तब-ए-मौसिकी उस्ताद फैय़ाज खान और अफ़तब-ए-मौसकी उस्ताद फैय़ाज खान जैसे दिग्गजों के लिए योगदान दे रहे हैं।

उस्ताद असलम ख़ाँ साहब जन्मजात प्रतिभाशाली संगीतकार थे, उन्होंने विविध विशेषताओं को अपनी व्यक्तिगत शैली में मिलाया। जो कि जबरदस्त कलात्मकता थी। उनकी गायकी ने दुनिया भर के लोगों को आकर्षित किया। उस्ताद असलम ख़ाँ ने म्युज़िक डायरेक्टर इक़बाल दरबार की 8 फिल्मों में भी अपनी आवाज़ का जादू चलाया था। उन्होंने 400 के करीब रचनाएं आईटीसी एसआरए सप्तक (अहमदाबाद), एसएनए (नई दिल्ली), एआईआर (मुंबई और दिल्ली), गोवा अकादमी सम्वाद फाउंडेशन और एनसीपीए मुंबई में रिकॉर्ड कराया। उन्होंने सप्तक के साथ 50 रागों और एसआरए की 300 राग रिकॉर्ड कराये हैं।

अपने ज़िन्दगी के आखिरी पलों में उस्ताद असलम ख़ाँ साहब ख्याल गायकी के सबसे महान प्रदर्शकों में से एक के रूप में घोषित किया गया था। साथ ही उन्होंने पौराणिक खुर्जा, अट्रौली (जयपुर) और आगरा घरानों को बड़े पैमाने पर प्रतिनिधित्व भी किया हैं।

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